Saturday, 20 August 2011

अन्ना के अनशन की रात में उम्मीद की सुबह

नई दिल्ली ।। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की जंग 24 घंटे लगातार चल रही है। रात को जब आप लोग अपने घरों में पंखे और एयरकंडीशनर की ठंडी हवा में सो रहे थे तब भी रामलीला मैदान पर अन्ना बिना कुछ खाए इस मशाल को जलाए हुए थे। अन्ना मंच पर आराम कर रहे थे तो उनके समर्थक और वॉलंटियर रात को हो रही बारिश की परवाह किए बिना जोश को कायम रखे थे। रामलीला मैदान पर पूरी रात रुककर हर पल का हाल जुटाया इस संवाददाता ने।

रात 11:30 
टोपी से भरा बैग खाली 
रामलीला मैदान के बाहर मेन रोड पर अन्ना समर्थकों का तांता लगा था। एक ग्रुप आ रहा था, तो दूसरा जा रहा था। सड़क वॉलंटियर्स से गांधी टोपी खरीदने की होड़ मची थी। इसके दोनों तरफ वॉलंटियर मैं अन्ना हजारे हूं लिख कर दे रहा था। कुछ लोग अपनी मर्जी से अन्ना हम तुम्हारे साथ हैं, लिखवाना चाहते थे। थोड़ी ही देर में टोपी से भरा थैला खाली हो गया। इसके अलावा बड़े और छोटे तिरंगे झंडे की भी खूब डिमांड थी। जो लोग रामलीला मैदान से लौटकर जा रहे थे, उनमें से कुछ ने अपना तिरंगा आने वाले लोगों को थमा दिया। तिरंगे को लोग शान से सिर या शरीर में लपेटकर देशभक्ति के नारे लगाते हुए मैदान में पहुंच रहे थे। नारे कुछ इस तरह के थे-मैं भी अन्ना, तू भी अन्ना/ अब तो सारा देश है अन्ना..... अन्ना नहीं ये आंधी है/देश का दूसरा गांधी है......देश की बेटी कैसी हो/ किरन बेदी जैसी हो...... ये अंदर की बात है/पुलिस हमारे साथ है। अन्ना के वॉलंटियर्स बिस्कट के छोटे-छोटे पैकेट्स और पानी के पॉलिथिन बांट रहे थे। हालांकि, वॉलंटियर्स और पुलिसकर्मी मिनरल वॉटर पी रहे थे, जबकि मैदान में पहुंचने वाले समर्थकों को पानी का पॉलिथिन पैक बांटा जा रहा था। खाने में पूड़ी-सब्जी की व्यवस्था थी। स्टॉल पर भीड़ थी।

रात 12 बजे 
अन्ना को तलाश रही थीं नजरें 
रामलीला मैदान में स्टेज के आसपास लोगों का हुजूम लगा था। लोग दो-चार के ग्रुप में आ रहे थे और मैदान में भी वे इसी तरह गाने और नारे लगा रहे था। स्टेज थोड़ी दूरी पर शामियाना लगाया गया था, जिसमें 100-150 लोग आराम कर रहे थे। मैदान में आने वालों की नजरें अन्ना और उनके सहयोगियों को ढूंढ रही थीं। अपनी फैमिली के साथ आई एक महिला ने वॉलंटियर्स से पूछा कि अन्ना धरने पर किधर बैठे हैं? उन्हें बताया कि यह उनके आराम का समय है। अब वह सुबह स्टेज पर आएंगे। महिला निराश होकर वहां से तुरंत चली गईं।

रात 12:15 
परिवारों का आना था जारी 
आधी रात के बाद भी लोगों के आने का सिलसिला जारी था। इनमें कुछ प्रफेशनल्स थे, कुछ स्टूडेंट तो कुछ पूरे परिवार के साथ आए थे। मैदान के बाहर सड़क पर एक ग्रुप पर्चे बांट रहा था। वहां से गुजरने वाले हर वीइकल वाले को रोक यह पर्चा दिया जा रहा था। इससे थोड़ी देर के लिए जाम जैसी स्थिति भी हो गई। लोग यह समझ कर इसे ले रहे थे कि यह अन्ना के अनशन से जुड़ा पर्चा है, लेकिन यह पर्चा टीम अन्ना का नहीं था। इस पर्चे पर शहीद भगत सिंह और दूसरी ओर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के संस्थापक राजीव दीक्षित की तस्वीर छपी थी। इसमें भारतीय इतिहास से जुड़ी कई चीजों पर सवाल खड़ा किया गया है।

रात 12:30 
शराबियों का भी हुड़दंग 
अन्ना का समर्थन करने आए कुछ युवक स्टेज के बाईं ओर से बैरिकेड्स के बावजूद स्टेज तक पहुंचने की नाकाम कोशिश की। स्टेज के बेहद करीब मीडियाकर्मियों, वॉलंटियर्स और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रोका गया। युवकों ने शराब पी रखी थी और वे स्टेज पर जाकर नारे लगाने की जिद कर रहे थे। वे किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थे। बहुत समझाने के बाद उनसे पीछा छूटा। थोड़ी देर बाद स्टेज के दाईं ओर से भी इसी तरह स्टेज तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने सख्ती बरतते हुए उन्हें रोक लिया।

रात 1:00-2:00 बजे 
हमारे बच्चों की खातिर है लड़ाई 
स्टेज के आसपास समर्थकों का कई समूह बिखरा हुआ था। रात गहरी होने के बाद भी लोगों को जोश कम नहीं पड़ा था। लोगों का आने-जाने का सिलसिला भी चल रहा था। इस दौरान थोड़ी देर के लिए समर्थकों का उत्साह ठंडा पड़ गया और उनकी संख्या में भी कमी आई। एक दूसरी टीम ने स्टेज के बिलकुल करीब खाने का स्टॉल लगाया। इसमें चावल, छोले और पनीर थे। लोगों ने छककर खाने का मजा लिया। उधर, मैदान के गड्ढों को भरने काम भी चल रहा था। एमसीडी की दो-तीन गाड़ियां इस को अंजाम देने में लगी थीं।

नोएडा के एक प्राइवेट संस्थान में काम करने वाले मनीष शर्मा अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ अन्ना का समर्थन करने आए थे। उन्होंने कहा कि अपनी लाइफ में ऐसी क्रांति उन्होंने नहीं देखी थी। उनका कहना था कि करप्शन के खिलाफ अन्ना की आवाज बुलंद करने के लिए वह रात 11 बजे ड्यूटी खत्म करके यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने और बच्चे के भविष्य की खातिर समर्थन दे रहे हैं।

रात 3:00 बजे 
बारिश का भी वेलकम 
समर्थकों में ब्रेक के बाद फिर से उत्साह नजर आया। पूरे जोशोखरोश के साथ उन्होंने नारे लगाने शुरू कर दिए। उनके उत्साह को देखते हुए आसमान से पानी की बौछार होने लगी। हालांकि, यह बहुत देर तक नहीं हुई। इसके बाद थोड़ी देर तक बूंदाबांदी होती रही। सभी लोग छिपने के लिए शामियाने में आए गए थे। हल्की बारिश के बाद ही शामियाना टपकने लगा। वहां सोए लोगों को बचने के लिए उपाय करने पड़े। बारिश से पहले चाय की व्यवस्था की गई थी।

तड़के 4:00 बजे 
पुलिस वालों ने दिया ज्ञान 
बारिश से बचने के लिए शामियाना में आए कुछ लोग यहीं जमे हुए थे। कुछ पुलिस वाले भी यहां आ गए थे। इनमें से एक कुछ लड़कों को सफलता के टिप्स दे रहा था। पुलिसकर्मी ने लड़कों को सलाह दी कि उन्हें ध्यान लगाकर पढ़ना चाहिए और आईएएस/आईपीएस बनकर देश की सेवा करनी चाहिए। ऑफिसर बन जाने के बाद नेताओं की न सुनें और वहीं करें जो उन्हें ठीक लगे। पुलिसकर्मी ने कहा कि नेता की बात नहीं मानने पर सस्पेंशन होगा और कुछ नहीं। जोशीले पुलिस वाले ने यह भी कहा कि किरन बेदी कमिश्नर होतीं तो नेताओं की खाल निकाल लेतीं। इतना कहने के बाद अचानक उसे कुछ याद आया और उसने कहा कि यदि आसपास मीडिया वाले होंगे, तो मेरी नौकरी चली जाएगी और बात बदल दी।

सुबह 6-8 बजे 
उम्मीद की सुबह 
उजाले के साथ ही अन्ना के स्टेज पर आने की सोचकर समर्थक स्टेज के दाईं ओर इकट्ठा होकर नारे और देशभक्ति गीत गाने लगे। इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के कैमरे स्टैंड पर सजने लगे। कुछ जॉगिंग करने वाले बुजुर्ग हाफ पैंट और टी-शर्ट में मैदान में पहुंचे। धीरे-धीरे अन्ना समर्थकों की भीड़ बढ़ने लगी थी। साथ ही संतरे और केले भी वॉलंटियर्स ने बांटे। 

अपने सांसद से करवाएं जन लोकपाल बिल का समर्थनः टीम अन्ना

नई दिल्ली।। पब्लिक का भारी सपोर्ट देख अन्ना हजारे नेअपने तेवर सख्त कर लिए हैं। शनिवार को मंच पर आतेही अन्ना ने फिर दहाड़ा। अन्ना ने कहा कि इस देश केखजाने को चोरों से नहीं बल्कि भ्रष्टाचारी नेताओं से खतराहै। शाम को उन्होंने इस आंदोलन के पीछे आरएसएस का हाथ बताने वालों को पागलखाना भेजने की सलाह भी दे दी। उन्होंने कहा कि हम पर बेतुके आरोप लगाए जा रहे हैं।
वहीं टीम अन्ना के एक मेंबर अरविंद केजरीवाल ने कहा किजुडिशरी अकाउंटिबिलिटी बिल भी जो जनता ड्राफ्टकरेगी वह पारित होना चाहिए। टीम अन्ना ने लोगों से यह आह्वान भी किया कि वे अपने-अपने इलाके के सांसदों पर इस बात का दबाव बनाएं कि वे संसद में जनलोकपाल बिल का समर्थन करें। 

शनिवार को रामलीला मैदान में मौजूद अपने समर्थकों सेअन्ना ने कहा कि मैं पूरी तरह स्वस्थ और जन लोकपालविधेयक पारित होने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में उनके वजन में 3.5 किलो कीकमी की बात बताई जा रही है। गौरतलब है कि शुक्रवारको रामलीला पहुंचते ही अन्ना ने यह कहकर चौंका दियाकि बिल पास होने तक वह रामलीला मैदान नहीं छोड़ेंगे। अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा है किसरकारी लोकपाल बिल को पूरी तरह से बदलना होगा इसमें सुधार या संशोधन की कोई गुंजाइश नहीं है। 

पढ़ें ब्लॉगः राहुल गांधी की ताजपोशी कराएगा अन्ना का आंदोलन? 

अन्ना ने शनिवार को फिर कहा मैंने अपनी जिंदगी का फैसला कर लिया है। अब बिल पास कराना सरकार काकाम है। उसके पास संसद और स्थायी समिति में बहुमत हासिल है। वह देखे कि बिल कैसे पास होगा। अगर बिलइस मौजूदा सेशन में पास नहीं होता तो अपनी आखिरी सांस तक उपवास जारी रखूंगा। हमें सितंबर तकपरमिशन हासिल है लेकिन अगर 30 अगस्त तक बिल पास नहीं होता तो लोगों से जेल भरने के लिए कहाजाएगा। 

खुले दिमाग से बातचीत को तैयार 
इस बीच टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा है कि हम सरकार के साथ बातचीत के लिए खुले दिमाग सेतैयार हैं लेकिन हम करप्शन के मसले पर समझौता नहीं करेंगे। एक अन्य सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहाकि समस्याओं का हल सिर्फ बातचीत से हो सकता है। सरकार से किसी ने बातचीत के लिए हमसे संपर्क नहींकिया है। 

यह पूछे जाने पर कि जस्टिस संतोष हेगड़े ने कहा है कि टीम हजारे पीएम और जुडिशरी को लोकपाल के दायरेसे बाहर रखने पर विचार कर सकती है केजरीवाल ने कहा कि यह जस्टिस हेगड़े का अपना विचार होगा। अन्नाकी मुहिम में बदलाव नहीं आया है। जुडिशरी अकाउंटिबिलिटी बिल भी जो जनता ड्राफ्ट करेगी वह पारितहोना चाहिए। गौरतलब है कि सरकार जुडिशरी में फैले करप्शन को रोकने और जजों को जवाबदेह बनाने के लिएजल्द ही संसद में जुडिशरी अकाउंटिबिलिटी बिल पेश करने वाली है। 

अपने इलाके के सांसद को पकड़ें 
टीम अन्ना हजारे ने आज अपने समर्थकों से अपील की कि वे अपने अपने क्षेत्र के सांसदों के पास जाएं और उनसेजन लोकपाल विधेयक का समर्थन करने को कहें। स्वामी अग्निवेश ने रामलीला मैदान में हजारे समर्थकों से कहाकि अभी तीन दिन संसद नहीं चलेगी और सभी सांसद अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में होंगे। हजारे के समर्थकइसका फायदा उठाएं और सांसदों के पास जाकर जन लोकपाल विधेयक के पक्ष में दबाव बनाएं। अग्निवेश ने कहाकि लोकपाल विधेयक पर गौर कर रही संसद की स्थायी समिति का कोई सदस्य भी यहां आकर जनता की रायको समझ सकता है। 

आरएसएस का हाथ बतानेवालों को पागलखाना भेजो 
अन्ना हजारे आज आंदोलन को बदनाम करने वाले लोगों पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि बेतुके आरोप लगाकर वक्त बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है। अन्ना से संवाददाताओं ने उन आरोपों का जिक्र किया जिसमें आंदोलन के पीछे आरएसएस का हाथ बताया गया था। अन्ना ने कहा कि अगर उन लोगों का बस चले तो वे हमें पाकिस्तान से भी जोड़ देंगे। ऐसे लोगों का दिमाग खराब है, इन्हें पागलखाना भेज देना चाहिए। 

लालू और अमर बनाएंगे करप्शन के खिलाफ कानून 
अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि स्टैंडिंग कमिटी में लालू प्रसाद और अमर सिंह भी हैं। आप इसी से समझ सकते हैं कि करप्शन को रोकने का कानून बनाने की जिम्मेदारी जब इन लोगों पर है तो ये लोग कैसा बिल लाएंगे। 

क्या हो गया है इस देश को?

 क्या हो गया है इस देश को? कहाँ जा रहे हैं हम उत्थान की तरफ या पतन की ओर? कर्तव्यों से विमुख होते भारत को देख कर मन क्यूँ न विचलित हो? क्या माताओं ने अपने ललनाओं को इस लिए खोया था की उन्हें ये दिन देखना पड़े. क्या हमने स्वतंत्रता इस लिए प्राप्त की थी की अपने स्वार्थ और अपने हवस की पूर्ति के लिए हम भारत की अस्मिता को दांव पर लगा दें? कभी अर्जुन और कर्ण जैसे महान योद्धाओं की धरती कही जानी वाली इस माँ का क्या दोष है इसमें? गांधी जी वस्त्रों को पहनकर हम क्या साबित करना चाहते हैं? उनके आदर्शों के साथ हो रहे दैनिक बलात्कार के विषय में सोचना क्या हमारा कर्त्तव्य नहीं? राम जन्मभूमि, बहुत ही विवादित स्थान, लाखों भारतियों का मरघट. एक ऐसा कब्रगाह, जहाँ अपने स्वार्थ के लिए मनुष्यों ने श्री राम के ऊपर ही कलंक मढ़ दिया.
बचपन से लेकर आजतक, इस अनबुझ पहेली का रहस्य समझ नहीं आया मुझे. गीता से लेकर कुरान तक, रामायण से लेकर बाईबल तक, हर ग्रन्थ, भाईचारे और प्रेम का सन्देश देता आया है. कृष्ण की गीता से क्या सीखा हमने? अपने मनगढ़ंत विचारों को नीरीह और नासमझ मनुष्यों पर थोप दें. तू हिन्दू है और तू मुस्लमान, मैं सिख हूँ और तू इसी, क्या यही पाठ पढाया श्री कृष्ण ने अर्जुन को? अगर उत्तर नहीं है तो फिर आप और मैं क्यूँ नफरत के बीज बो रहे हैं? क्या हक़ बनता है आपका की आप मासूमों को यूँ गुमराह कर खून की होली खेलते रहे?
१९४७ से लेकर अबतक हुए दंगों की जब जिम्मेदारी लेने की बात आती है तो आप बगलें झांकते नज़र आते हैं. आप कहते हैं आपका मंतव्य इंसानों को नुक्सान पहुँचाना कतई नहीं था. आप क्या साबित करना चाहते हैं की ये जितने भी दंगे हुए हैं, ये जो आये दिन आतंकवाद और नक्सलवाद की आग में पूरा हिंदुस्तान जल रहा है वो हम कर रहे हैं. हम, यानी आम आदमी, हमें तो दो वक़्त की रोटी के बारे सोचने से फुर्सत नहीं. सर पर एक छत हो, इस लालसा की पूर्ति के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लालसा मन में ही रहती है और आँखें बंद हो जाती हैं.
विश्व हिन्दू परिषद्, मुस्लिम लीग, ईसाई सभा, क्या है ये सब? एक-दुसरे के ह्रदय में नफरत फ़ैलाने के अलावा आपने किया क्या है? नहीं चाहिए हमें मंदिर, मस्जिद में नमाज भी नहीं पढनी हमें, हमें बस दो पल चैन के नींद और दो रोटी दे दीजिये, हम इसी में खुश हैं. अगर आपको हमारी इतनी ही फिक्र है, निकाल फेंकिये उस डर को जो हमारे ह्रदय में है, वो डर जो हम घर से निकलते समय महसूस करते हैं. डर, जो हमें ट्रेन में सफ़र करते समय लगता है, डर जो सिनेमाहोल से लेकर बच्चों के स्कुल तक, हमारे साथ-साथ चलता है. कर सकते हैं ऐसा? अगर नहीं कर सकते तो ये झूठा आडम्बर छोडिये. छोड़ दीजिये हमें हमारे हाल पर. हमारे हितैषी मत बनिए. हम जी लेंगे, जब आपके हाथों अपनों की हत्या होते देख भी जी लिया तो आगे भी जी लेंगे.
आप कहते हैं आप अयोध्या में मस्जिद नहीं बनाने देंगे. आप कौन हैं? जनता (भारतीय) हम हैं और बातें आप करते हैं. जनता(भारतीय) की सहनशक्ति की परीक्षा मत लीजिये. अंग्रेजों से लेकर मुग़लों तक ने हमारे रौद्र रूप को देखा है. क्या आप इतिहास दोहराना चाहते हैं? क्या आप सुअनना चाहते हैं युवा भारत की आवाज़?
हम अखंड भारत के पुत्र, भारत की अखंडता के लिए अपनी जान भी गंवाने से नहीं डरते. हमने डरना नहीं सीखा है. हमने आह्वान कर दिया है, एक क्रान्ति का, उस क्रांति का जिसमें हमने भारत के लिए एक हसीन सपना देखा. एक सपना, जिसमें भारत विश्वगुरु का ताज पुनः पहन कर विश्व को, नव भारत-सब भारत का पाठ पढ़ा रहा है. अपने युवा कन्धों पर भारत को संस्कारों के रास्ते से सभयता के शीर्ष पर ले जाने का स्वाना देखा है, हम युवाओं ने. हम एक हैं, न हम हिन्दू हैं, न हम मुसलमान हैं, न हम सिख हैं और न ही ईसाई. न हममे कोई छोटा है न कोई बड़ा, न कोई अछूत है और न कोई ब्रह्मण. शिक्षा की महत्ता को पहचानने वाले, आदर्शों की शक्ति को मानने वाले, काम, क्रोध और मोह की लालसे विरक्त, हम नवभारत के नवांकुरित फुल हैं.
हमने क्रांति का बिगुल बजा दिया है. अब हम नहीं रुकेंगे. हर साथ के साथ, हमारे कदम हिंदुस्तान की उन्नति की तरफ बढ़ते रहेंगे. हम आतंकवाद से नहीं डरते. हजारों की संख्या में उपस्थित ये जानवर, करोड़ों की हमारी ताकत से नहीं जीत सकते. अब समय आ गया है, इन जानवरों और हैवानों को अपनी शक्ति दिखाने. आप नेताओं के लिए कुछ आखरी शब्द.
हमें रोटी दो, शान्ति दो, घर दो और प्यार दो. अगर आप ये सब नहीं दे सकते तो आप अपनी गद्दी छोड़ने को तैयार रहे. हमने कमर कस लिया है, घर से कीचड साफ़ करने की शुरुआत भी कर दी है. या तो आप गद्दी छोड़ दीजिये या हम छुडवा देंगे.
जय हिंद!

Friday, 12 August 2011

इश्क की नाकामी का बदला वकीलों से!

प्रमुख संवाददाता ॥ नई दिल्ली 
वकीलों की कारों से 15 महंगे सेलफोन, दो स्टीरियो और ईसीएम चोरी करने के आरोप में पटियाला हाउस कोर्ट का एक स्टॉल बॉय गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि वकील की बेटी से प्रेम में निराशा मिलने के बाद उसने वकील बिरादरी को टारगेट बनाया था।

पटियाला हाउस कोर्ट की पार्किंग में वकीलों की कारों से चोरियों की वारदात हो रही थीं। तिलक मार्ग पुलिस इनकी तहकीकात कर रही थी। अडिशनल पुलिस कमिश्नर (नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट) केशव द्विवेदी के मुताबिक, पुलिस को जानकारी मिली कि इन चोरियों में पटियाला हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स के एक स्टॉल में नौकरी करने वाले पंकज (22) का हाथ है। एसएचओ मुकेश वालिया की टीम ने उसे पकड़ कर पूछताछ की तो उसकी निशानदेही पर 15 महंगे सेलफोन, दो स्टीरियो, ईसीएम और बटनदार चाकू बरामद हुआ। यह चोरियां उसने वकीलों की कारों से की थी।

अडिशनल कमिश्नर ने बताया कि पंकज बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है। वहां उसे एक वकील की बेटी से प्रेम हो गया। वकील को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इस लड़के की पिटाई कर अपनी बेटी से दूर रहने की हिदायत दी। इस घटना के बाद पंकज की सौतेली मां ने उसे घर से बाहर निकाल दिया। वह दिल्ली आ गया, लेकिन उसने वकील साहब को माफ नहीं किया। उसने पटियाला हाउस कोर्ट के एक स्टॉल में नौकरी शुरू की और वकीलों से बदला लेने के मकसद से उनके सामान की चोरियां शुरू कर दी। उसे खुद भी याद नहीं है कि उसने कितनी चोरियां की हैं।

आरक्षण


आरक्षण
टाइम्स न्यूज नेटवर्क 12 August 2011, 10:55am IST
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फिल्म आरक्षण का सीन
आरक्षण से और
यूपी में 'आरक्षण' पर 2 महीने का बैन
प्रकाश झा ने रिक्शे पर किया 'आरक्षण' का प्रमोशन
नई फिल्मः आरक्षण 
कलाकारः अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, मनोज वाजपेयी, प्रतीक बब्बर
डायरेक्टरः प्रकाश झा
प्रड्यूसरः प्रकाश झा, फिरोज नाडियावाला
म्यूजिक डायरेक्टरः शंकर एहसान लॉय
अवधिः 2 घंटे 47 मिनट
हमारी रेटिंगः /photo.cms?msid=9576051
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सामाजिक और गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए मशहूर फिल्म डायरेक्टर प्रकाश झा राजनीति फिल्म के बाद एक और गंभीर मुद्दे को लेकर हाजिर हैं। प्रकाश झा की यह खासियत है कि वह मेनस्ट्रीम सिनेमा को मसाले के साथ परोसते रहे हैं। उनकी पिछली फिल्मों गंगाजल, अपहरण और राजनीति में ऐसे ही गंभीर मुद्दों को उठाया गया है। इस बार उनकी फिल्म का सब्जेक्ट 'आरक्षण' जैसा गंभीर मुद्दा है। फिल्म को लेकर पहले ही काफी विवाद हो चुका है। यूपी, आंध्र प्रदेश और पंजाब में हालांकि फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है, लेकिन इन सबके बावजूद फिल्म दिल्ली समेत कई राज्यों में रिलीज़ हुई है।

कहानीः फिल्म की कहानी भोपाल के एक नामी कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. प्रभाकर आनंद (अमिताभ बच्चन) की है जो पिछले कई सालों से इस कॉलेज को अपने आदर्शवादी सिद्धांतों और सख्त नियमों से चलाते आ रहे हैं। लेकिन उन्हें भारत के रिजर्वेशन सिस्टम पर की गई अपनी टिप्पणी के चलते प्रिसिंपल के पद से हटने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे में उनकी मदद करने के लिए सामने आते हैं सैफ अली खान, जो दीपक कुमार के किरदार में हैं। खुद को आनंद सर और स्टूडेंट्स का शुभचिंतक बताने वाले दीपक आनंद सर के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। दरअसल, दीपक भारत के एजुकेशन सिस्टम को ऐसे लोगों (मनोज वाजपेयी) से बचाना चाहते हैं, जो उसे पूरी तरह व्यावसायिक बनाने पर तुले हैं। वहीं आनंद सर का एक दूसरा पसंदीदा स्टूडेंट प्रतीक बब्बर जो ऊंची जाति से संबंध रखता है, आनंद सर पर पक्षपात करने का आरोप लगाता है और उन के विरुद्ध खड़ा हो जाता है। यहीं से शुरू होता है आरक्षण पर राजनीति खेलने का गेम जो फिल्म को एक मोड़ से दूसरे मोड़ पर ले जाता है।

ऐक्टिंगः अमिताभ बच्चन ने कॉलेज के आदर्शवादी प्रिंसिपल डॉ. प्रभाकर आनंद की भूमिका को बहुत ही बेहतरीन ढंग से निभाया है। फिल्म में वह ऐसे आदर्शवादी व्यक्ति की भूमिका में हैं जो मेरिट में तो यकीन करता ही है, लेकिन पिछड़े लोगों को भी पूरा मौका दिए जाने के पक्ष में है। फिल्म में दीपिका पादुकोण ने अमिताभ बच्चन की बेटी पूर्वी की भूमिका निभाई है, जो सैफ अली से प्यार करती है।

सैफ अली खान ने दीपिक के किरदार में बहुत ही जबरदस्त ऐक्टिंग की है। फिल्म में कई जगहों पर सैफ अली और अमिताभ के बीच बहस और विवाद के दृश्य देखने लायक हैं। ओंकारा के बाद सैफ अली खान की यह सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस है। और वहीं, एजुकेशन सिस्टम को अपने हित के लिए इस्तेमाल करने और प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स को बढ़ावा देने वाले नेगेटिव किरदार मनोज वाजपेयी ने काफी अच्छा काम किया है। प्रतीक बब्बर अच्छे ऐक्टर हैं यह उन्होंने इस फिल्म में भी साबित किया है।

डायरेक्टरः प्रकाश झा जैसे बॉलिवुड के कुछ चुनिंदा डायरेक्टर ही हैं जो इस तरह के गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाने का माद्दा रखते हैं। हालांकि प्रकाश झा फिल्म में सिर्फ मुद्दा उठाया है, इसका कोई हल पेश नहीं किया है। फिल्म का पहला हाफ आरक्षण के मुद्दे को जबरदस्त तरीके से उठाता है, लेकिन फिल्म के दूसरे हाफ में यह मुद्दा पटरी से पूरी तरह उतरा हुआ नज़र आता है। फिल्म के दूसरे हाफ में अमिताभ बच्चन प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ फ्री ट्यूशंस देने का अभियान शुरू करते हैं, जिसमें सैफ अली और उनके दूसरे समर्थक उनका साथ देते हैं।

क्यों देखें: अगर आप सीरियस सिनेमा के शौकीन हैं और प्रकाश झा की फिल्में गंगाजल, अपहरण और राजनीति के प्रशंसक रहे हैं, तो इस फिल्म को जरूर देखें।
निखत काज़मी 

नोटः अगर आपने फिल्म देखी तो आप हमें फिल्म का रिव्यू बताएं और लिखें कि क्या फिल्म पर बैन लगाना चाहिए या नहीं? अपनी राय लिखने के लिए यहां क्लिक करें...

नौटंकी यात्राएं छोड़ यहां आएं राहुल गांधीः उद्धव ठाकरे


पुणे मुंबई।। पुणे में अंडरग्राउंड वाटर पाइपलाइन प्रॉजेक्ट के विरोध के दौरान पुलिस की फायरिंग से 3 किसानों की मौत से कांग्रेस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार बुरी तरह से घिर गई है। इस मामले में पुलिस और सरकार ने कहा था कि आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, जबकि विडियो फुटेज से साफ है कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे से नीचे भाग रहे किसानों पर पुलिस निशाना साधकर गोलियां चला रही हैं। सरकार और पुलिस का झूठ उजागर होने के बाद विपक्ष अब पूरे फॉर्म में है और पुलिसवालों की गिरफ्तारी के साथ-साथ गृहमंत्री आर. आर. पाटिल की बर्खास्तगी की मांग कर रहा है।

वहीं, शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी पर सीधे हमला किया है। ठाकरे ने कहा, राहुल गांधी ने कभी इस क्षेत्र का दौरा नहीं किया। बस वह एक बार यहां पैराग्लाइडिंग करने के लिए आए थे। अब राहुल गांधी कहां हैं ?वैसे तो वह यूपी में नौटंकी यात्राएं करते रहते हैं, उन्हें यहां आकर इस मुद्दे की सचाई का पता लगाना चाहिए। 

ठाकरे ने कहा, 'मोरेश्वर साठे की मौत किस प्रकार हुई यह स्पष्ट होना चाहिए। सरकार द्वारा किसानों की निर्मम हत्या की गई है। सरकार रक्षक है या भक्षक इस मसले का बातचीत से समाधान हो सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम इस मसले पर न्यायिक संघर्ष करेंगे।'

विपक्ष का हमला 
विडियो फुटेज देखने के बाद विपक्ष ने शुक्रवार को चौथे दिन भी विधानसभा में हंगामा किया, जिसके चलते विधानसभा को स्थगित करना पड़ा। इस बीच, फायरिंग के मामले में छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। सभी सस्पेंड पुलिसकर्मी कॉन्स्टेबल हैं। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर, मृतक मोरेश्वर साठे के परिवार वालों द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के बावजूद महाराष्ट्र सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे है।

चश्मदीदों के बयान 
फायरिंग में मारे गए किसान मोरेश्वर साठे के एक रिश्तेदार ने बताया, मेरे भाई को 3 पुलिसवालों खींचकर कार में ले गए। कुछ देर बाद उसे छोड़कर उस पर फायरिंग की गई, यह एक एनकाउंटर था। और यह सब शरद पवार के भतीजे अजीत पवार की जानकारी में हुआ। मैं मीडिया से कहना चाहता हूं कि इस मामले के जांच करे सचाई सबके सामने लाए। 

एक और चश्मदीद ने कहा, मेरे दोस्त को 3 पुलिसकर्मी उठा कर कार में ले गए और उसके साथ बहुत मारपीट की गई। बाद में उसे छोड़ कर गोली मार दी गई। उस पर तीन बार फायर किया गया। यह एक एनकाउंटर था। 

क्या है मामला? 
गौरतलब है कि 9 अगस्त को पुणे के निकट मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था, जिसमें पुलिस की गोली से तीन किसानों की मौत हो गई थी। तब पुलिस की ओर से कहा गया था कि किसानों द्वारा पुलिस पर भीषण पथराव के कारण स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस के अलावा राज्य के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने भी गुरुवार को यह कहकर मामले को रहस्यमय बना दिया था कि गोलीबारी की शुरुआत एक इंडिका कार से हुई, जिसके बाद पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी।

लेकिन समाचार चैनलों पर दिखाए गए उस दिन की घटना के विडियो ने पुलिस और गृहमंत्री दोनों को झूठा साबित कर दिया है। इसके बावजूद सरकार अपनी बात पर अड़ी है कि पुलिस को गोलियां आत्मरक्षा में चलानी पड़ी थीं। विडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे से नीचे भाग रहे किसानों पर निशाना साधकर गोलियां चला रही है। विडियो में एक पुलिसकर्मी अपनी सरकारी रिवॉल्वर से, जबकि दूसरा पुलिसकर्मी ऑटोमैटिक राइफल से किसानों पर निशाना साधते दिखाई दे रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस घटना में 21 राउंड आंसू गैस, 34 राउंड रबर की गोलियां एवं 51 राउंड वास्तविक गोलियां चलाई गई हैं। मृतक किसानों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि गोलियां मृतकों की कमर के ऊपर लगी हैं।

कौन है मोरेश्वर साठे? 
इस घटना में मोरेश्वर साठे नामक एक किसान भी मारा गया है, जबकि एक स्थानीय समाचार पत्र में छपे एक चित्र में जीवित साठे को दो पुलिसकर्मियों के हत्थे चढ़ा दिखाया गया है। मावल पाइपलाइन प्रॉजेक्ट के लिए मोश्वेवर साठे की जमीन भी अधिग्रहित हो रही थी, जिसके विरोध में वह वहां प्रदर्शन कर रहा था।

पुलिस की गुंडागर्दी 
विडियो में पुलिसकर्मियों को एक्सप्रेस-वे पर खड़ी कारों एवं मोटरसाइकिलों को तोड़ते हुए भी दिखाया गया है। जबकि पुलिस वाहनों की तोड़फोड़ का एकतरफा आरोप किसानों पर मढ़ रही है। विडियो के सार्वजनिक होने के बाद बुधवार तक जहां विपक्ष उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को इस घटना का दोषी मान रहा था, वहीं गुरुवार को पूरी सरकार उसके निशाने पर थी। यहां तक कि क्रुद्ध विपक्ष ने नेता विरोधी दल एकनाथ खडसे को भी नहीं बोलने दिया। राज्य के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने कहा है कि हाई कोर्ट के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की जांच में यदि कोई पुलिसकर्मी किसानों पर बेवजह गोली चलाने का दोषी पाया जाएगा, तो उसे निलंबित नहीं बल्कि सीधे बर्खास्त कर दिया जाएगा। पाटिल ने दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने का आश्वासन भी दिया है।