Friday, 12 August 2011

नौटंकी यात्राएं छोड़ यहां आएं राहुल गांधीः उद्धव ठाकरे


पुणे मुंबई।। पुणे में अंडरग्राउंड वाटर पाइपलाइन प्रॉजेक्ट के विरोध के दौरान पुलिस की फायरिंग से 3 किसानों की मौत से कांग्रेस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार बुरी तरह से घिर गई है। इस मामले में पुलिस और सरकार ने कहा था कि आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, जबकि विडियो फुटेज से साफ है कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे से नीचे भाग रहे किसानों पर पुलिस निशाना साधकर गोलियां चला रही हैं। सरकार और पुलिस का झूठ उजागर होने के बाद विपक्ष अब पूरे फॉर्म में है और पुलिसवालों की गिरफ्तारी के साथ-साथ गृहमंत्री आर. आर. पाटिल की बर्खास्तगी की मांग कर रहा है।

वहीं, शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी पर सीधे हमला किया है। ठाकरे ने कहा, राहुल गांधी ने कभी इस क्षेत्र का दौरा नहीं किया। बस वह एक बार यहां पैराग्लाइडिंग करने के लिए आए थे। अब राहुल गांधी कहां हैं ?वैसे तो वह यूपी में नौटंकी यात्राएं करते रहते हैं, उन्हें यहां आकर इस मुद्दे की सचाई का पता लगाना चाहिए। 

ठाकरे ने कहा, 'मोरेश्वर साठे की मौत किस प्रकार हुई यह स्पष्ट होना चाहिए। सरकार द्वारा किसानों की निर्मम हत्या की गई है। सरकार रक्षक है या भक्षक इस मसले का बातचीत से समाधान हो सकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम इस मसले पर न्यायिक संघर्ष करेंगे।'

विपक्ष का हमला 
विडियो फुटेज देखने के बाद विपक्ष ने शुक्रवार को चौथे दिन भी विधानसभा में हंगामा किया, जिसके चलते विधानसभा को स्थगित करना पड़ा। इस बीच, फायरिंग के मामले में छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। सभी सस्पेंड पुलिसकर्मी कॉन्स्टेबल हैं। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर, मृतक मोरेश्वर साठे के परिवार वालों द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के बावजूद महाराष्ट्र सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे है।

चश्मदीदों के बयान 
फायरिंग में मारे गए किसान मोरेश्वर साठे के एक रिश्तेदार ने बताया, मेरे भाई को 3 पुलिसवालों खींचकर कार में ले गए। कुछ देर बाद उसे छोड़कर उस पर फायरिंग की गई, यह एक एनकाउंटर था। और यह सब शरद पवार के भतीजे अजीत पवार की जानकारी में हुआ। मैं मीडिया से कहना चाहता हूं कि इस मामले के जांच करे सचाई सबके सामने लाए। 

एक और चश्मदीद ने कहा, मेरे दोस्त को 3 पुलिसकर्मी उठा कर कार में ले गए और उसके साथ बहुत मारपीट की गई। बाद में उसे छोड़ कर गोली मार दी गई। उस पर तीन बार फायर किया गया। यह एक एनकाउंटर था। 

क्या है मामला? 
गौरतलब है कि 9 अगस्त को पुणे के निकट मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था, जिसमें पुलिस की गोली से तीन किसानों की मौत हो गई थी। तब पुलिस की ओर से कहा गया था कि किसानों द्वारा पुलिस पर भीषण पथराव के कारण स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस के अलावा राज्य के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने भी गुरुवार को यह कहकर मामले को रहस्यमय बना दिया था कि गोलीबारी की शुरुआत एक इंडिका कार से हुई, जिसके बाद पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी।

लेकिन समाचार चैनलों पर दिखाए गए उस दिन की घटना के विडियो ने पुलिस और गृहमंत्री दोनों को झूठा साबित कर दिया है। इसके बावजूद सरकार अपनी बात पर अड़ी है कि पुलिस को गोलियां आत्मरक्षा में चलानी पड़ी थीं। विडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे से नीचे भाग रहे किसानों पर निशाना साधकर गोलियां चला रही है। विडियो में एक पुलिसकर्मी अपनी सरकारी रिवॉल्वर से, जबकि दूसरा पुलिसकर्मी ऑटोमैटिक राइफल से किसानों पर निशाना साधते दिखाई दे रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस घटना में 21 राउंड आंसू गैस, 34 राउंड रबर की गोलियां एवं 51 राउंड वास्तविक गोलियां चलाई गई हैं। मृतक किसानों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि गोलियां मृतकों की कमर के ऊपर लगी हैं।

कौन है मोरेश्वर साठे? 
इस घटना में मोरेश्वर साठे नामक एक किसान भी मारा गया है, जबकि एक स्थानीय समाचार पत्र में छपे एक चित्र में जीवित साठे को दो पुलिसकर्मियों के हत्थे चढ़ा दिखाया गया है। मावल पाइपलाइन प्रॉजेक्ट के लिए मोश्वेवर साठे की जमीन भी अधिग्रहित हो रही थी, जिसके विरोध में वह वहां प्रदर्शन कर रहा था।

पुलिस की गुंडागर्दी 
विडियो में पुलिसकर्मियों को एक्सप्रेस-वे पर खड़ी कारों एवं मोटरसाइकिलों को तोड़ते हुए भी दिखाया गया है। जबकि पुलिस वाहनों की तोड़फोड़ का एकतरफा आरोप किसानों पर मढ़ रही है। विडियो के सार्वजनिक होने के बाद बुधवार तक जहां विपक्ष उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को इस घटना का दोषी मान रहा था, वहीं गुरुवार को पूरी सरकार उसके निशाने पर थी। यहां तक कि क्रुद्ध विपक्ष ने नेता विरोधी दल एकनाथ खडसे को भी नहीं बोलने दिया। राज्य के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने कहा है कि हाई कोर्ट के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की जांच में यदि कोई पुलिसकर्मी किसानों पर बेवजह गोली चलाने का दोषी पाया जाएगा, तो उसे निलंबित नहीं बल्कि सीधे बर्खास्त कर दिया जाएगा। पाटिल ने दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने का आश्वासन भी दिया है।

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