Friday, 12 August 2011

आरक्षण


आरक्षण
टाइम्स न्यूज नेटवर्क 12 August 2011, 10:55am IST
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फिल्म आरक्षण का सीन
आरक्षण से और
यूपी में 'आरक्षण' पर 2 महीने का बैन
प्रकाश झा ने रिक्शे पर किया 'आरक्षण' का प्रमोशन
नई फिल्मः आरक्षण 
कलाकारः अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, मनोज वाजपेयी, प्रतीक बब्बर
डायरेक्टरः प्रकाश झा
प्रड्यूसरः प्रकाश झा, फिरोज नाडियावाला
म्यूजिक डायरेक्टरः शंकर एहसान लॉय
अवधिः 2 घंटे 47 मिनट
हमारी रेटिंगः /photo.cms?msid=9576051
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सामाजिक और गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए मशहूर फिल्म डायरेक्टर प्रकाश झा राजनीति फिल्म के बाद एक और गंभीर मुद्दे को लेकर हाजिर हैं। प्रकाश झा की यह खासियत है कि वह मेनस्ट्रीम सिनेमा को मसाले के साथ परोसते रहे हैं। उनकी पिछली फिल्मों गंगाजल, अपहरण और राजनीति में ऐसे ही गंभीर मुद्दों को उठाया गया है। इस बार उनकी फिल्म का सब्जेक्ट 'आरक्षण' जैसा गंभीर मुद्दा है। फिल्म को लेकर पहले ही काफी विवाद हो चुका है। यूपी, आंध्र प्रदेश और पंजाब में हालांकि फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है, लेकिन इन सबके बावजूद फिल्म दिल्ली समेत कई राज्यों में रिलीज़ हुई है।

कहानीः फिल्म की कहानी भोपाल के एक नामी कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. प्रभाकर आनंद (अमिताभ बच्चन) की है जो पिछले कई सालों से इस कॉलेज को अपने आदर्शवादी सिद्धांतों और सख्त नियमों से चलाते आ रहे हैं। लेकिन उन्हें भारत के रिजर्वेशन सिस्टम पर की गई अपनी टिप्पणी के चलते प्रिसिंपल के पद से हटने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे में उनकी मदद करने के लिए सामने आते हैं सैफ अली खान, जो दीपक कुमार के किरदार में हैं। खुद को आनंद सर और स्टूडेंट्स का शुभचिंतक बताने वाले दीपक आनंद सर के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। दरअसल, दीपक भारत के एजुकेशन सिस्टम को ऐसे लोगों (मनोज वाजपेयी) से बचाना चाहते हैं, जो उसे पूरी तरह व्यावसायिक बनाने पर तुले हैं। वहीं आनंद सर का एक दूसरा पसंदीदा स्टूडेंट प्रतीक बब्बर जो ऊंची जाति से संबंध रखता है, आनंद सर पर पक्षपात करने का आरोप लगाता है और उन के विरुद्ध खड़ा हो जाता है। यहीं से शुरू होता है आरक्षण पर राजनीति खेलने का गेम जो फिल्म को एक मोड़ से दूसरे मोड़ पर ले जाता है।

ऐक्टिंगः अमिताभ बच्चन ने कॉलेज के आदर्शवादी प्रिंसिपल डॉ. प्रभाकर आनंद की भूमिका को बहुत ही बेहतरीन ढंग से निभाया है। फिल्म में वह ऐसे आदर्शवादी व्यक्ति की भूमिका में हैं जो मेरिट में तो यकीन करता ही है, लेकिन पिछड़े लोगों को भी पूरा मौका दिए जाने के पक्ष में है। फिल्म में दीपिका पादुकोण ने अमिताभ बच्चन की बेटी पूर्वी की भूमिका निभाई है, जो सैफ अली से प्यार करती है।

सैफ अली खान ने दीपिक के किरदार में बहुत ही जबरदस्त ऐक्टिंग की है। फिल्म में कई जगहों पर सैफ अली और अमिताभ के बीच बहस और विवाद के दृश्य देखने लायक हैं। ओंकारा के बाद सैफ अली खान की यह सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस है। और वहीं, एजुकेशन सिस्टम को अपने हित के लिए इस्तेमाल करने और प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स को बढ़ावा देने वाले नेगेटिव किरदार मनोज वाजपेयी ने काफी अच्छा काम किया है। प्रतीक बब्बर अच्छे ऐक्टर हैं यह उन्होंने इस फिल्म में भी साबित किया है।

डायरेक्टरः प्रकाश झा जैसे बॉलिवुड के कुछ चुनिंदा डायरेक्टर ही हैं जो इस तरह के गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाने का माद्दा रखते हैं। हालांकि प्रकाश झा फिल्म में सिर्फ मुद्दा उठाया है, इसका कोई हल पेश नहीं किया है। फिल्म का पहला हाफ आरक्षण के मुद्दे को जबरदस्त तरीके से उठाता है, लेकिन फिल्म के दूसरे हाफ में यह मुद्दा पटरी से पूरी तरह उतरा हुआ नज़र आता है। फिल्म के दूसरे हाफ में अमिताभ बच्चन प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ फ्री ट्यूशंस देने का अभियान शुरू करते हैं, जिसमें सैफ अली और उनके दूसरे समर्थक उनका साथ देते हैं।

क्यों देखें: अगर आप सीरियस सिनेमा के शौकीन हैं और प्रकाश झा की फिल्में गंगाजल, अपहरण और राजनीति के प्रशंसक रहे हैं, तो इस फिल्म को जरूर देखें।
निखत काज़मी 

नोटः अगर आपने फिल्म देखी तो आप हमें फिल्म का रिव्यू बताएं और लिखें कि क्या फिल्म पर बैन लगाना चाहिए या नहीं? अपनी राय लिखने के लिए यहां क्लिक करें...

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