Saturday, 20 August 2011

अन्ना के अनशन की रात में उम्मीद की सुबह

नई दिल्ली ।। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की जंग 24 घंटे लगातार चल रही है। रात को जब आप लोग अपने घरों में पंखे और एयरकंडीशनर की ठंडी हवा में सो रहे थे तब भी रामलीला मैदान पर अन्ना बिना कुछ खाए इस मशाल को जलाए हुए थे। अन्ना मंच पर आराम कर रहे थे तो उनके समर्थक और वॉलंटियर रात को हो रही बारिश की परवाह किए बिना जोश को कायम रखे थे। रामलीला मैदान पर पूरी रात रुककर हर पल का हाल जुटाया इस संवाददाता ने।

रात 11:30 
टोपी से भरा बैग खाली 
रामलीला मैदान के बाहर मेन रोड पर अन्ना समर्थकों का तांता लगा था। एक ग्रुप आ रहा था, तो दूसरा जा रहा था। सड़क वॉलंटियर्स से गांधी टोपी खरीदने की होड़ मची थी। इसके दोनों तरफ वॉलंटियर मैं अन्ना हजारे हूं लिख कर दे रहा था। कुछ लोग अपनी मर्जी से अन्ना हम तुम्हारे साथ हैं, लिखवाना चाहते थे। थोड़ी ही देर में टोपी से भरा थैला खाली हो गया। इसके अलावा बड़े और छोटे तिरंगे झंडे की भी खूब डिमांड थी। जो लोग रामलीला मैदान से लौटकर जा रहे थे, उनमें से कुछ ने अपना तिरंगा आने वाले लोगों को थमा दिया। तिरंगे को लोग शान से सिर या शरीर में लपेटकर देशभक्ति के नारे लगाते हुए मैदान में पहुंच रहे थे। नारे कुछ इस तरह के थे-मैं भी अन्ना, तू भी अन्ना/ अब तो सारा देश है अन्ना..... अन्ना नहीं ये आंधी है/देश का दूसरा गांधी है......देश की बेटी कैसी हो/ किरन बेदी जैसी हो...... ये अंदर की बात है/पुलिस हमारे साथ है। अन्ना के वॉलंटियर्स बिस्कट के छोटे-छोटे पैकेट्स और पानी के पॉलिथिन बांट रहे थे। हालांकि, वॉलंटियर्स और पुलिसकर्मी मिनरल वॉटर पी रहे थे, जबकि मैदान में पहुंचने वाले समर्थकों को पानी का पॉलिथिन पैक बांटा जा रहा था। खाने में पूड़ी-सब्जी की व्यवस्था थी। स्टॉल पर भीड़ थी।

रात 12 बजे 
अन्ना को तलाश रही थीं नजरें 
रामलीला मैदान में स्टेज के आसपास लोगों का हुजूम लगा था। लोग दो-चार के ग्रुप में आ रहे थे और मैदान में भी वे इसी तरह गाने और नारे लगा रहे था। स्टेज थोड़ी दूरी पर शामियाना लगाया गया था, जिसमें 100-150 लोग आराम कर रहे थे। मैदान में आने वालों की नजरें अन्ना और उनके सहयोगियों को ढूंढ रही थीं। अपनी फैमिली के साथ आई एक महिला ने वॉलंटियर्स से पूछा कि अन्ना धरने पर किधर बैठे हैं? उन्हें बताया कि यह उनके आराम का समय है। अब वह सुबह स्टेज पर आएंगे। महिला निराश होकर वहां से तुरंत चली गईं।

रात 12:15 
परिवारों का आना था जारी 
आधी रात के बाद भी लोगों के आने का सिलसिला जारी था। इनमें कुछ प्रफेशनल्स थे, कुछ स्टूडेंट तो कुछ पूरे परिवार के साथ आए थे। मैदान के बाहर सड़क पर एक ग्रुप पर्चे बांट रहा था। वहां से गुजरने वाले हर वीइकल वाले को रोक यह पर्चा दिया जा रहा था। इससे थोड़ी देर के लिए जाम जैसी स्थिति भी हो गई। लोग यह समझ कर इसे ले रहे थे कि यह अन्ना के अनशन से जुड़ा पर्चा है, लेकिन यह पर्चा टीम अन्ना का नहीं था। इस पर्चे पर शहीद भगत सिंह और दूसरी ओर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के संस्थापक राजीव दीक्षित की तस्वीर छपी थी। इसमें भारतीय इतिहास से जुड़ी कई चीजों पर सवाल खड़ा किया गया है।

रात 12:30 
शराबियों का भी हुड़दंग 
अन्ना का समर्थन करने आए कुछ युवक स्टेज के बाईं ओर से बैरिकेड्स के बावजूद स्टेज तक पहुंचने की नाकाम कोशिश की। स्टेज के बेहद करीब मीडियाकर्मियों, वॉलंटियर्स और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रोका गया। युवकों ने शराब पी रखी थी और वे स्टेज पर जाकर नारे लगाने की जिद कर रहे थे। वे किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थे। बहुत समझाने के बाद उनसे पीछा छूटा। थोड़ी देर बाद स्टेज के दाईं ओर से भी इसी तरह स्टेज तक पहुंचने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने सख्ती बरतते हुए उन्हें रोक लिया।

रात 1:00-2:00 बजे 
हमारे बच्चों की खातिर है लड़ाई 
स्टेज के आसपास समर्थकों का कई समूह बिखरा हुआ था। रात गहरी होने के बाद भी लोगों को जोश कम नहीं पड़ा था। लोगों का आने-जाने का सिलसिला भी चल रहा था। इस दौरान थोड़ी देर के लिए समर्थकों का उत्साह ठंडा पड़ गया और उनकी संख्या में भी कमी आई। एक दूसरी टीम ने स्टेज के बिलकुल करीब खाने का स्टॉल लगाया। इसमें चावल, छोले और पनीर थे। लोगों ने छककर खाने का मजा लिया। उधर, मैदान के गड्ढों को भरने काम भी चल रहा था। एमसीडी की दो-तीन गाड़ियां इस को अंजाम देने में लगी थीं।

नोएडा के एक प्राइवेट संस्थान में काम करने वाले मनीष शर्मा अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ अन्ना का समर्थन करने आए थे। उन्होंने कहा कि अपनी लाइफ में ऐसी क्रांति उन्होंने नहीं देखी थी। उनका कहना था कि करप्शन के खिलाफ अन्ना की आवाज बुलंद करने के लिए वह रात 11 बजे ड्यूटी खत्म करके यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने और बच्चे के भविष्य की खातिर समर्थन दे रहे हैं।

रात 3:00 बजे 
बारिश का भी वेलकम 
समर्थकों में ब्रेक के बाद फिर से उत्साह नजर आया। पूरे जोशोखरोश के साथ उन्होंने नारे लगाने शुरू कर दिए। उनके उत्साह को देखते हुए आसमान से पानी की बौछार होने लगी। हालांकि, यह बहुत देर तक नहीं हुई। इसके बाद थोड़ी देर तक बूंदाबांदी होती रही। सभी लोग छिपने के लिए शामियाने में आए गए थे। हल्की बारिश के बाद ही शामियाना टपकने लगा। वहां सोए लोगों को बचने के लिए उपाय करने पड़े। बारिश से पहले चाय की व्यवस्था की गई थी।

तड़के 4:00 बजे 
पुलिस वालों ने दिया ज्ञान 
बारिश से बचने के लिए शामियाना में आए कुछ लोग यहीं जमे हुए थे। कुछ पुलिस वाले भी यहां आ गए थे। इनमें से एक कुछ लड़कों को सफलता के टिप्स दे रहा था। पुलिसकर्मी ने लड़कों को सलाह दी कि उन्हें ध्यान लगाकर पढ़ना चाहिए और आईएएस/आईपीएस बनकर देश की सेवा करनी चाहिए। ऑफिसर बन जाने के बाद नेताओं की न सुनें और वहीं करें जो उन्हें ठीक लगे। पुलिसकर्मी ने कहा कि नेता की बात नहीं मानने पर सस्पेंशन होगा और कुछ नहीं। जोशीले पुलिस वाले ने यह भी कहा कि किरन बेदी कमिश्नर होतीं तो नेताओं की खाल निकाल लेतीं। इतना कहने के बाद अचानक उसे कुछ याद आया और उसने कहा कि यदि आसपास मीडिया वाले होंगे, तो मेरी नौकरी चली जाएगी और बात बदल दी।

सुबह 6-8 बजे 
उम्मीद की सुबह 
उजाले के साथ ही अन्ना के स्टेज पर आने की सोचकर समर्थक स्टेज के दाईं ओर इकट्ठा होकर नारे और देशभक्ति गीत गाने लगे। इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के कैमरे स्टैंड पर सजने लगे। कुछ जॉगिंग करने वाले बुजुर्ग हाफ पैंट और टी-शर्ट में मैदान में पहुंचे। धीरे-धीरे अन्ना समर्थकों की भीड़ बढ़ने लगी थी। साथ ही संतरे और केले भी वॉलंटियर्स ने बांटे। 

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